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संस्कॄत में अनुवाद

हिन्दी से संस्कॄत में अनुवाद करने के लिये तीनो काल , भूत, भविष्य, तथा वर्तमान , कालों के प्रत्यय , तीनों वचन , एक वचन , द्विवचन , तथा बहुवचन   कारक परिचय , विभक्तियाँ ,प्रथमा से लेकर सप्तमी तक सातों विभक्तियाँ , आदि….. कुछ प्राथमिक बातों का ज्ञान होना आवश्यक है। इन सारी बातों का ज्ञान होने के पश्चात हिन्दी से संस्कृत में अनुवाद करना सरल हो जाता है           मै जाता हूँ ।    अहम् गच्छामि   । वर्तमान काल   में धातु इस प्रकार चलाई जाती है                    एक वचन               द्विवचन           बहुवचन उत्तम पुरुष       गच्छामि               गच्छावः             गच्छ...

यास्क का आख्यातज सिद्धान्त

शब्दों का आख्यातज सिद्धान्त का अभिप्राय है कि क्या सभी शब्द धातुओं से बने है या स्वतः निष्पन्न होते है।यास्क इस मत के पोषक है कि सभी शब्द आख्यातज है , जिसे सिद्ध करने के लिए ही सम्पूर्ण निरुक्त की रचना हुई है ।सभी शब्द धातुज है, इस सिद्धान्त के प्रतिपादक है   वैयाकरणाचार्य   शाकटायण       । शाकटायण-     बहुत   अच्छे वैयाकरण है ।इनके सिद्धान्त के अनुसार ही उणादि सूत्रों की रचना हुई है ।जिसकी मूल भित्ति यही है कि सभी शब्दों की व्युत्पत्ति सम्भव है । “सर्वनामधातुजम्’   समस्त निरुक्तकार इस पक्ष में है,   जिसमें यास्काचार्य भी है । वे कहते है ‘नत्वेव न निर्ब्रुयात्’   । गार्ग्य-     प्राचीन वैयाकरण है । उनके सम्मत में कुछ शब्द धातुज है और कुछ रुठ़    ।जिनकी जढ़ में धातु को ढुढना अनावश्यक है ।इसी के साथ यह भी ध्यान रखना चाहिये कि शब्द में धातु ढुँढते समय उस शब्द का अर्थ धातु के संवादी होना चाहिये ।इनके मत से सहमति रखने वाले पाणिनी व पतण्जलि है ।पतण्जलि के अनुसार   उणादयो व्युत्पन्न...

कारक-विचार

           संस्कृत में संज्ञाओं की सात विभक्तियाँ होती है। सर्वनाम-्विचार तथा विशेषण –विचार से भी ज्ञात हो चुका है कि सर्वनाम और विशेषण की भी सात विभक्तियाँ होती है। इन विभक्तियों का क्या प्रयोग होता है, यह अब जानेगे।                              ‘कारक’ का अर्थ है, ऐसी वस्तु जिसका क्रिया के पुरा करने में काम पड़े। उदाहरण के लिए ‘अयोध्या में रघु ने अपने हाथ से लाखों रुपये ब्राह्मणों को दान दिए’ इस वाक्य में दान क्रिया के पुरा करने के लिए जिन-जिन वस्तुओं का उपयोग हुवा , वे ‘कारक’ कहलायेगे। दान की क्रिया किसी स्थान पर होती है, । यहाँ ‘अयोध्या’ में हुई, इसलिए ‘अयोध्या’ कारक हुई। इस क्रिया के करने वाले रघु थे, इसलिए ‘रघु’ कारक हुए। यह क्रिया हाथ से पुरी की गई, इसलिए ‘हाथ’ कारक हुआ, ‘रुपये’ दिये गये, इसलिए ‘रुपये’ कारक हुए। और ब्राह्मणों को दिए गये, इसलिए ‘ब्राह्मण’ कारक हुए।   ...

विशेषण-विचार

                                      जो विद्यार्थी संस्कृत में एम.ए करना चाहते है, उनसे सम्बन्धित बहुपयोगी सामग्री यहाँ प्रस्तुत करना चाहती हुँ। भाषा-विज्ञान , वेद व्याकरण , साहित्य ,वेदांत ,सुक्त, चारों वेद आदि सभी विषयों से सम्बन्धित जानकारी अत्यन्त संक्षेप में देना चाहती हुँ, जिसका लाभ विद्यार्थी को मिल सके।और अधिक से अधिक बच्चे इसका समुचित लाभ ले सके।                        सर्वप्रथम व्याकरण का सामान्य ज्ञान होना अत्यन्त आवश्यक है। व्याकरण के बिना संस्कृत भाषा का ज्ञान हो ही नही सकता। मेरी कोशीश है कि अत्यन्त सरल भाषा में व्याकरण सीख सके। संज्ञा, सर्वनाम, विशेषण , कारक आदि की सामान्य जानकारी प्राप्त करने के पश्चात ही भाषा का समुचित ज्ञान प्राप्त हो सकेगा।       ...