विष्णु सूक्त
सुख जाता है इसलिये बल का नाम ‘शूष्’ (४) शूष् धातु से घण् प्रत्यय करने पर ‘शूष्’ शब्द की सिद्धी होती है । शूषम् मन्म का विशेषण है । (५) मन्म- मन्त्र, मनन , स्रोत । (६) विममे- उदात्त का लोप नही , पाद के प्रारम्भ में है , यद्वृतान्तनित्यं । (७)पदेभि;- अवग्रह से अलग नही दिखाया । (प्रयतम्- दीर्घ, विशाल , नियत (सायण) । (८) वृष्ण- वर्धनशील कामा...